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Sunday, August 26, 2012

prarthna

हे घट-घट के वासी प्रभु!!हम सब आपके पुत्र-पुत्रियाँ आपके श्रीचरणों में श्रद्धावनत होकर प्रणाम करते हैं..आपकी कृपाओं के लिए,,दयापूर्ण अनुकम्पा के लिए हम ह्रदय से कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं..हे दाता,,दीनदयाल!!हम सब की यही कामना है कि हम आपके अच्छे--सच्चे भक्त कहला सकें,,आपके प्यारे पुत्र-पुत्रियाँ बनकर सदा निष्काम भाव से कर्म करते रहें..हमारा मन,,हमारी बुद्धि,,हमारी आत्मा हमेशा पवित्र बनी रहे,,हमारे अंग-प्रत्यंग सदा सेवा में संलग्न रहें..हमारा ह्रदय सदा विशाल हो और आपकी प्रेममय भक्ति,,करुणा और दया से भरा रहे..हे नारायण!! हमारा इस दुनिया में आना सार्थक हो हम अपने हर दिन को शुभ दिन सिद्ध कर पायें,,हर घडी को शुभ घडी बनायें,ऐसा आशीष हमें प्रदान कीजिये..हमारे द्वारा इस जगत में ऐसे कर्म हों कि यह शरीर छूटने के बाद भी उनकी सुगंध संसार में बनी रहे,,ऐसी प्रेरणा हमें प्रदान कीजिये..हे परम दयालुदेव !! सबके ऊपर आपकी कृपा बरस रही है,हम सब पर भी दया कीजिये,,सबके घर-परिवार सुख--समृद्धि से भरपूर हों,,सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों,,हमारी यह विनती आपके दरबार में स्वीकार हो,,सबका बेडा पार हो.."आचार्य सुधांशु"

Friday, August 10, 2012

आज क़ा प्रवचनांश

हरिओम 
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आज का जीवन सूत्र १०-८-१२ 
आज  क़ा  प्रवचनांश १०-८-१२  
१]हर  रोज  ऐसे  जीओ  जैसे  आज  ही  आख़िरी  जिंदगी है ! 
२]पहले से ही जाने के लिए त्यार रहो ताकि आख़िरी समय जाने मै परेशानी न हो !
३]जितनी दुआए ले सको लो ,बद दुआ किसी की मत् लो !
४] दिन-रात परखता राह ,ताकत दवाओं की ,
    हैरान रह गया जब देखी ताकत दुआओं की !!
५]अपने बड़ों को कभी दुःख मत् दो ,जितना उनका आशीर्वाद ले सकते हो लो बरकत रहेगी 
   नहीं तो उनके जाने के बाद बरकत भी चली जाएगी !
६]अपने मन को भगवान् से जोड़ दो ,चालाकी मत् करो !
७] जो भी कार्य करते हो यह मत् सोचो कि अपने लिए कर रहे हो ,सोचो कि भगवान् तेरे लिए कर रहा हूँ !




गुरुवर सुधांशुजी महाराज 

Wednesday, August 8, 2012

आज के प्रवचनांश




हरिओम 
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आज के प्रवचनांश   ८-८-१२ 
१]लोक व्यवहार को महत्त्व दो और लोक व्यवहार निभाना सीखो १
२]दुनिया कां काम आपके बिना चल जायेगा मगर आपका कां दुनिया के बिना नहीं चलेगा !
३]प्यार शब्धों में नहीं दिल में रखना और प्रशंसा शब्धों में और भावना मिला कर प्रकट करनी चाहिए !
४]कडवाहट शब्धों से प्रकट करदेना पर दिल में नहीं रखना !
५] ध्यान रखना धन बच्चों के लिए अमृत भी होसकता है और विष भी हो सकता है !
६] जहां व्यवस्था है वहां लक्ष्मी हैं !
७]व्यथा को व्यवस्था में बदल दो !
८] हर गलत काम क़ा कारण ढूड़ो और उन को दूर करो !







Monday, August 6, 2012

आज के प्रवचनांश

हरिओम 
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आज के प्रवचनांश   ६-८-१२ 
अगर आप कुछ पाना चाहते हैं तो सब से पहले अपने अदंर शान्ति लाओ !
अमेरिका मंगल में जिंदगी ढूड रहा है और भारत जिंदगी में मंगल ढूड रहा है !
अगर आपको शांत रहना है तो सब से पहले अपने आपको अनुशासन में रहना सीखो !
हर काम में अनुशासन ताकत देता है ,नियम से चलो योजना से चलो !
अगर आप बीमार हैं और शांत हैं तो जल्दी ठीक हो जाएगे और अगर अशांत हैं तो ठीक होने में समय लगेगा !